उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज जनपद अयोध्या में अयोध्या विद्यापीठ परिसर के नवनिर्मित श्रीराम मन्दिर में नूतन विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा एवं विद्यापीठ कॉलेज ऑफ नर्सिंग एण्ड पैरामेडिकल साइंसेज़ में ब्रह्मलीन जगद्गुरु स्वामी मधुसूदनाचार्य जी महाराज तथा ब्रह्मलीन जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी माधवाचार्य जी महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया।
इस अवसर पर आयोजित जनसभा को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या धाम की पावन धरा पर श्रीराम दरबार के भव्य विग्रहों की स्थापना करने का गौरव उन्हें प्राप्त हुआ है। साथ ही, पूज्य संत पूज्य स्वामी मधुसूदनाचार्य जी महाराज तथा पूज्य स्वामी जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी माधवाचार्य जी महाराज की दिव्य प्रतिमाओं की स्थापना का कार्यक्रम भी संपन्न हुआ है। इन संतों ने अपने धर्माचरण से इस पूरी धरा को पवित्र किया और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया था। मुख्यमंत्री जी ने इन पूज्य संतों की साधना को मूर्त रूप देने के लिए पूज्य संत जगद्गुरु रामानुजाचार्य पूज्य स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि पूज्य स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज ने जगद्गुरु के रूप में धर्म जागरण के एक वृहद कार्यक्रम को अपने हाथों में लिया है। साथ ही, धर्म जागरण और हमारी वर्तमान पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा प्राप्त कराने के अभियान से भी जुड़े हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूज्य संतों के आशीर्वाद और उनकी साधना से अयोध्या विद्यापीठ लोक कल्याण का माध्यम बनी है। जब संतों की साधना मूर्त रूप लेती है, तो ऐसे संस्थान बनते हैं। गांव में नर्सिंग, पैरामेडिकल तथा फार्मेसी की शिक्षा के दृष्टिगत जो भी छात्र-छात्राएं यहां से ए0एन0एम0, जी0एन0एम0, बी0एस0सी0 नर्सिंग, बी0फार्मा या डी0फार्मा सहित कोई भी पैरामेडिकल का कोर्स करेंगे, उसकी शत-प्रतिशत जॉब की गारंटी है। इस प्रकार के कार्यक्रमों को संचालित करना पूज्य संतों के आशीर्वाद के बगैर संभव नहीं है। इन पूज्य संतों ने अपना पूरा जीवन लोक कल्याण तथा धर्म जागरण के लिए समर्पित किया और समाज को एक नई प्रेरणा दी। जगद्गुरु पूज्य स्वामी माधवाचार्य जी महाराज ने अल्प अवधि में भी अपनी साधना और चमत्कार से लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने का कार्य किया। आज अशर्फी भवन का लोक कल्याणकारी कार्यक्रम हो या अयोध्या विद्यापीठ के माध्यम से कोरोना जैसी महामारी के दौरान किए गए उपकार के अनेक कार्यक्रम इसी का उदाहरण हैं। जब दुनिया महामारी के सामने पूरी तरह लाचार थी, तब हमारे पूज्य धर्माचार्य, धार्मिक स्थल और अयोध्या विद्यापीठ जैसे संस्थान लोक कल्याण के अभियान से जुड़कर महामारी को परास्त कर रहे थे। इसी का परिणाम था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना पर विजय प्राप्त की गई और भारत की 140 करोड़ की आबादी को महामारी से बचाया जा सका।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में 500 वर्षों का इंतजार समाप्त हुआ है। अयोध्या धाम में प्रभु श्रीरामलला के विराजमान होने के साथ पूज्य संतों की लंबी साधना और संघर्ष ने मूर्त रूप लिया है। पहले लोग यह पूछते थे कि क्या अयोध्या में श्रीरामलला का भव्य मंदिर बनेगा, तब हम कहते थे कि अवश्य बनेगा। पहले लोग पूछते थे कि क्या अयोध्या की सड़कें चौड़ी होंगी, तब हम कहते थे कि अयोध्या की सड़कें जरूर चौड़ी होंगी और अयोध्या के आसपास का क्षेत्र भी लाभान्वित होगा। आज लखनऊ से अयोध्या, लखनऊ से प्रयागराज, अयोध्या से रायबरेली, गोण्डा, बस्ती तथा काशी फोर लेन की कनेक्टिविटी से जुड़ चुके हैं। शेष मार्गों पर कार्य आगे बढ़ चुका है। पहले अयोध्या में एक सिंगल रेलवे लाइन थी। आज अयोध्या रेलवे की डबल लाइन से जुड़ चुका है। पहले अयोध्या में एयरपोर्ट नहीं था, आज इण्टरनेशनल एयरपोर्ट बन चुका है। 14-15 फ्लाइट अयोध्या से जुड़ चुकी हैं। अयोध्या में हवाई जहाज आने में हजारों वर्ष लग गए। भगवान श्रीराम अपने पुष्पक विमान से यहां पधारे थे।
अयोध्या को नई पहचान मिली है। यह कार्य आसानी से नहीं हुआ है। यह सम्मान देवयोग, गुरुकृपा और सन्तों के आशीर्वाद से मिला है। इसे संजोए रखने के लिए भी उतने ही परिश्रम और साधना की आवश्यकता है। इस सम्मान को बचाए रखना अयोध्यावासियों का दायित्व है। जो भी अयोध्या आए, यहां के वैभव, धार्मिक परम्परा और रीति-रिवाजों से अभिभूत होकर जाए। इसके लिए हमें प्रयास करना होगा। हमें इस प्रकार के कार्यक्रम और अभियान लगातार चलाते रहने होंगे। किसी भी सम या विषम परिस्थिति में, कोई भी हमें हमारे मूल्यों से डिगा न सके और हमारी भावनाओं के साथ खिलवाड़ ना कर सके, इसके लिए हमें प्रयास करने होंगे।
कल से काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी महोत्सव के कार्यक्रम प्रारम्भ हुए हैं। यह कार्यक्रम 01 वर्ष तक चलेंगे। आगामी 15 अगस्त को हम अमृत काल में आजादी के प्रथम आयोजन को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। 09 अगस्त, 1925 को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा जो खजाना ले जाया जा रहा था, क्रांतिकारियों ने काकोरी में ट्रेन रोक कर भारत माता की आजादी के लिए उस खजाने को अपने कब्जे में ले लिया था। खजाने का मूल्य मात्र 4,679 रुपये था, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने उन क्रांतिकारियों को ढूंढने में ही 10 लाख रुपये खर्च कर दिए। क्रांतिकारियों का पक्ष सुने बिना, उन्हें सजा भी दे दी गई।
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल में, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को गोण्डा जेल में, ठाकुर रोशन सिंह को इलाहाबाद की नैनी जेल तथा अशफाक उल्ला खां को फैजाबाद जेल में बंद किया गया था। आज फैजाबाद का नाम अयोध्या है और इलाहाबाद का नाम प्रयागराज है। चन्द्रशेखर आजाद उनके हाथ नहीं आए। वह ब्रिटिश हुकूमत का मुकाबला करते-करते शहीद हुए। यह सभी क्रांतिकारी अपने लिए नहीं जिए, बल्कि इस देश की स्वाधीनता के लिए जिए। इनका जीवन देश की स्वाधीनता के लिए था। उनकी एक ही तमन्ना थी कि ’इस भारत वर्ष में 100 बार मेरा जन्म हो, कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कर्म हो’। सभी क्रान्तिकारी यही कहते थे कि बार-बार उनका जन्म भारत की धरती पर हो और जन्म का कारण सदैव देश और परोपकार होना चाहिए।

हर व्यक्ति का संकल्प होना चाहिए कि उसके लिए देश महत्वपूर्ण, राष्ट्र सर्वोपरि: मुख्यमंत्री
लखनऊ : 10 अगस्त, 2024
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