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सिसोदिया की जमानत अर्जी पर 24 मार्च को होगी सुनवाई

नयी दिल्ली। दिल्ली शराब नीति मामले में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की लिखित दलील दाखिल करने को लेकर विशेष अदालत ने सुनवाई 24 मार्च तक स्थगित कर दी।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल ने केंद्रीय जांच ब्यूरो और बचाव पक्ष के वकील की ओर से दलीलें सुनने के बाद लिखित दलील दाखिल करने के लिए सुनवाई 24 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।
सिसोदिया के वकील ने अदालत में कहा कि सिसोदिया ने हमेशा जांच एजेंसी के साथ सहयोग किया है और तलाशी के दौरान उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि आवेदक सिसोदिया ने गवाहों को प्रभावित किया, सिवाय एक अस्पष्ट दावे के कि वह गवाहों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। यही नहीं सिसोदिया के पास से एक पैसा भी नहीं मिला है।
सिसोदिया से हिरासत में पूछताछ की अब आवश्यकता नहीं है और उनके भागने का खतरा भी नहीं है, अगर जमानत दी जाती है तो वह अदालत की ओर से लगाए गए सभी नियमों और शर्तों का पालन करने के लिए तैयार हैं। सीबीआई के सरकारी वकील ने सिसोदिया की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए अदालत के समक्ष कहा कि इस मामले में सिसोदिया द्वारा बार-बार फोन बदलना कोई निर्दोष कार्य नहीं है, बल्कि सबूतों को नष्ट करने के लिए ऐसा किया गया था। अगर जमानत दी जाती है तो वह निश्चित रूप से आबकारी नीति में सबूतों को नष्ट करने का प्रयास कर सकते हैं। अतः जमानत अर्जी को आधारहीन होने के कारण खारिज किया जा सकता है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सिसोदिया ने आज प्रवर्तन निदेशालय के मामले में एक और जमानत याचिका दायर की। विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल ने याचिका पर सुनवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी किया और ईडी मामले में जमानत अर्जी को 25 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की हिरासत समाप्त होने के बाद सिसोदिया वर्तमान में प्रवर्तन निदेशालय मामले में बंद हैं। ईडी के मामले में सिसोदिया की 22 मार्च तक पांच दिन की हिरासत और उसके बाद सीबीआई मामले में तीन अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में रहना है।

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