लखनऊ। अखिल भारतीय सांस्कृतिक संस्थान द्वारा गांधी भवन, लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय गांधी जयंती नाट्य महोत्सव 2025 की दूसरी प्रस्तुति पौराणिक नाटक “कैकेयी” रही। इस नाटक का लेखन एवं निर्देशन प्रख्यात रंगकर्मी राजेन्द्र तिवारी ने किया, जो पिछले 45 वर्षों से कला एवं रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। संस्था पिछले 35 वर्षों से लगातार लखनऊ में गांधी जयंती नाट्य महोत्सव का सफल आयोजन कर रही है और देशभर से रंगकर्मियों को इस मंच से जोड़कर भारतीय संस्कृति एवं विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य कर रही है।
भारतभूमि की प्राचीन कथाओं में एक ऐसी रानी का उल्लेख मिलता है, जिसे आज भी लोग गलत समझते हैं…वह रानी है – अयोध्या की महारानी कैकेयी! अक्सर जब हम रामायण की कथा सुनते हैं, तो कैकेयी का नाम आते ही मन में एक नकारात्मक छवि बन जाती है – “वह रानी जिसने श्रीराम को वनवास भेजा।”
परन्तु, क्या यह सम्पूर्ण सत्य है? क्या कैकेयी सचमुच कठोर हृदय वाली थीं? या फिर उन्होंने अपने पुत्र और पति के लिए, और धर्म की रक्षा के लिए, ऐसा बलिदान दिया जिसे संसार आज तक समझ नहीं पाया?
कैकेयी – वह रानी, जिसने युद्धभूमि पर अपने पति महाराज दशरथ का जीवन बचाया… वह रानी, जिसने राजपरंपरा और मर्यादा की रक्षा हेतु स्वयं को दोषी ठहराया… वह माँ, जिसने अपने पुत्र भरत को राज्य देकर भी अपने हृदय में राम के प्रति अगाध प्रेम छुपा कर रखा…आज का यह नाटक “माता कैकेयी” उसी अनसुनी गाथा को उजागर करने का प्रयास है। यह कथा है त्याग की… यह कथा है बलिदान की…यह कथा है उस माँ की, जिसे इतिहास ने दोषिनी कहा, पर सत्य ने “महान” सिद्ध किया।
कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन पिछले 20 वर्षों से देख रहे अश्वनी शुक्ला ने बताया कि इस नाटक में कलाकारों के रूप में ध्रुव खानचन्दानी, कशिश रीना सिंह, शिवम देवकते
देविका पटेल, प्रदीप श्रीवास्तव, साकेत राय, अक्षयरिका दास, मोनिका भारती, कुशाग्र सक्सेना, शिवदान नायक, प्रतीक्षा निर्मल, प्रतीक्षा गुप्ता, आदर्श पटेल, शाहीन, धैर्य खानचंदानी, त्रिलोक सिंह, दीपक यादव अनिकेत गव्हाणे, समीर गुप्ता, शैरन मथायस ने अपनी दमदार अभिनय कला से दर्शकों का दिल जीता। कार्यक्रम के प्रबंधन में राकेश वर्मा, अंजना तिवारी, अमित तिवारी, ललित पांडे, सचिन सिंह, राकेश तिवारी, सर्वेश कुमार एवं गणेश रावत ने अपना अमूल्य योगदान दिया।
नाटक “कैकेयी” ने दिखाया कि माता कैकेयी का त्याग और बलिदान अद्वितीय था, ऐसा बलिदान कोई और नहीं दे सकता।
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