लखनऊ।
आज सनातन संगम न्यास के संयुक्त तत्वाधान में प्रथम सनातनी धम्म आयोजन हुआ। इस अवसर पर वरिष्ठ समाज सेविका नम्रता पाठक व विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के संयोजक विनीत शारदा रहे। इस आयोजन का आरम्भ सनातनी पद्धति के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चार व हवन के साथ हुआ। तेज शंकर अवस्थी यजमान रूप में सभा का प्रतिनिधत्व किया।
इसके बाद विभिन्न पंथों के धर्माचार्यों द्वारा बौध मत के थेरावादी व महायानी मंत्रोच्चारण के अलावा णमोकार मंत्र व गुरबाणी का पवित्र पाठ हुआ। तत्पश्चात ग्रंथी सरदार रंजीत सिंह जी ने शबद कीर्तन, अभिषेक जैन, वेन उत्तमासीरी ने अपने अपने मतों के अनुसार मंत्रोचारण किया। सभी विद्वानों ने हिन्दू, जैन, बौद्ध एवं सिख धर्म की व्याख्या करते हुए अपने अपने मतों में सनातन मूल्यों के विद्यमान होने को स्पष्ट किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सनातन ज्योति को धम्म अतिथियों एवं धर्माचार्यों के द्वारा प्रज्ज्वलित किया किया गया। इस दौरान मुख्यअतिथि नम्रता पाठक, वरिष्ठ समाज सेवी, सनातन संगम न्यास के न्यासी डॉ अतुल कृष्ण, देवेश दीक्षित, विवेक कुमार, सरदार जसविंदर सिंह, अभिषेक जैन, पूर्व विधायक सुरेश राठौर, आदि ने सनातन संगम ज्योति को संयुक्त रूप से प्रज्जवल्लित किया।
सनातन संगम न्यास के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने बताया कि सनातन का अर्थ है, वह जो चिरकाल से है, जो शाश्वत है जो अपरिवर्तनीय है । जब इस शब्द का प्रयोग किसी दर्शन के संबंध में किया जाता है तो इसका अर्थ उन सिद्धांतों से होता है जो किसी व्यक्ति के द्वारा नहीं बनाए गए एवं स्वयं प्रकृति ने उन्हें मानव को उसके धर्म स्वरूप दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति के द्वारा दिए गए सनातन मूल्य वे हैं जिन पर चलकर व्यक्ति अपना एवं संपूर्ण सृष्टि का मंगल कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह सनातन मूल्य प्रेम, करुणा, मैत्री, समानता सद्भावना एवं समन्वय का हैं। वर्तमान में यदि सनातन धर्म की चर्चा की जाती है तो ऐसा प्रतीत होता है कि मूर्ति पूजक हिंदू ही सनातनी है। उन्होंने कहा कि सनातन भावों का किसी की पूजा पद्धति से कोई संबंध नहीं है, प्राथमिक रूप से यह भाव लौकिक व्यवहार से संबंध रखते हैं, यदि इतिहास को देखा जाए तो सनातन धर्म की स्पष्ट व्याख्या तथागत बुद्ध ने की थी।
सारनाथ में धर्म चक्र प्रवर्तन करते समय तथागत बुद्ध ने सर्वप्रथम मध्य मार्ग एवं अष्टांगिक मार्ग का विवरण देते हुए यह स्पष्ट रूप से कहा था कि, ‘‘ऐसो धर्म सनातनो‘‘।अतः यदि कोई भी पथ जो प्रेम करुणा मैत्री सामान्य सद्भावना एवं समन्वय के भावों को अपने में समाहित करता हो वह सनातनी पथ है। इन भावनाओं को समाहित किये हुए हिन्दू, जैन, सिख, बौद्ध सभी सनातनी पंथ है। उन्होंने कहा कि यदि कोई मुस्लिम या इसाई भी इन भावनाओं को अपनाता है तो वो भी सनातनी मुस्लिम व सनातनी इसाई होगा।
डॉ. अतुल कृष्ण ने आगे कहा कि आज आपसी टकराव के कारण जो अंधकार चारों ओर फैला है उसे मिटाने का काम सनातन संगम की यह ज्योति ज्वाला बनकर करेगी। सनातन संगम के इस आयोजन के लिए आज के दिन को चुने जाने की वजह बताते हुए कहा कि आज का दिन समन्वय का दिन है । आज स्वर्गीय दीन दयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि है, उन्हें याद करने का दिन है। उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद नामक विचारधारा दी। उनको सनातन संगम की ज्योति जलाकर याद करने से अच्छी श्रद्धांजलि भला क्या हो सकती है।
मुख्य अतिथि नम्रता पाठक ने कहा कि सनातन संगम के इस पुनीत विचारधारा को ना केवल शहरो तक सीमित किया जाए बल्कि इसे गांव-गांव तक पहुंचाया जाए। इस काम में मैं सनातम संगम न्यास के साथ सदैव कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए तैयार हूँ।
इस अवसर पर सनातन संगम न्यास की लखनऊ शाखा के प्रभारी देवेश दीक्षित ने कहा कि लखनऊ में जो सनातन ज्योति प्रज्जवलित की गयी है वो पूरे प्रदेश में प्रकाश पुन्यपुंज के रूप में तीव्रता के साथ फैलेगी शीघ्र ही कानपुर, बनारस, इत्यादि प्रमुख नगरों में भी कार्यक्रम आयोजित किया जाऐगा।
कार्यक्रम में वक्ता के तौर पर अपने संबोधन में सर्वाेच्च न्यायालय में अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता सुबुही खान ने कहा कि धर्म के सभी रुपों को स्वीकार करते हुए उनमें विश्वास करना, पंथों का सम्मान करना व संस्कृति को संरक्षित व संवर्धित करना ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है। जिस सनातन संस्कृति को हम जागृत करना चाहते हैं वो क्या है, हमारा कर्तव्य ही सनातन है। अपने कर्तव्यों को अच्छी तरह निर्वहन करना ही सनातन है। मैं सनातनी हूं लेकिन पंथ मुस्लिम है। सनातन एक ऐसा शब्द है जिसमे सभी धर्म सम्माहित हैं।
कार्यक्रम में विशेष रूप से ब्रिगेडियर यशपाल, कर्नल अमित, क्रिकेट के प्रशिक्षक, संजय, सहित सैकड़ों लोगों की उपस्थिति रही।
Parivartan Live
