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61 देशों से पधारे मुख्य न्यायाधीशों व न्यायाधीशों की घोषणा

बच्चों के लिए सुरक्षित व सुखमय विश्व व्यवस्था बनाना ही हमारा मकसद

लखनऊ, 6 नवम्बर। सिटी मोन्टेसरी स्कूल के तत्वावधान में आयोजित ‘विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 24वें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ में पधारे मुख्य न्यायाधीशों, न्यायाधीशों व प्रख्यात हस्तियों ने एक स्वर से घोषणा की है कि बच्चों के लिए सुरक्षित व सुखमय विश्व व्यवस्था बनाना ही हमारा मकसद है और इसी उद्देश्य हेतु हम यहाँ एकत्रित हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि सभी के सहयोग व प्रयास से एकता, शान्ति व सौहार्द का वातावरण बनेगा। समारोह की अध्यक्षता करते हुए हैती के पूर्व प्रधानमंत्री जीन-हेनरी सेन्ट ने कहा कि मानवजाति भयभीत एवं सशंकित हैं क्योंकि आतंकवाद, युद्ध एवं परमाणु युद्ध के खतरे हमारे सामने हैं। ऐसे में सभी राष्ट्राध्यक्षों का कर्तव्य है कि वे अपना पूरा प्रयास हालात सुधारने में करें और भविष्य में इन्हें और बेहतर बनाने का प्रयास करें। मैं डॉ. जगदीश गाँधी के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ, जो विश्व के बच्चों के सुरक्षित व सुखमय भविष्य के लिए विगत कई वर्षों से इस सम्मेलन को आयोजित कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में 61 देशों के 250 से अधिक मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश समेत विभिन्न देशों के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री व अन्य प्रख्यात हस्तियाँ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

सम्मेलन के चौथे दिन आज प्रातःकालीन सत्र के प्लेनरी सेशन में अपने विचार रखते हुए अल्बानिया के हाई ज्यूडिशियल काउन्सिल की अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुश्री नौरेदा एल लागामी ने कहा कि विश्व के विभिन्न भागों में चल रहे युद्धों में मध्यस्तता करके शान्ति स्थापित करने में संयुक्त राष्ट्र विफल रहा है। अतः यू.एन. चार्टर में बदलाव लाकर इसे अधिक प्रभावशाली बनाने की अत्यन्त आवश्यकता है। मलावी सुप्रीम कोर्ट के जज, न्यायमूर्ति रोलैंड सेक्स्टस एमबीवंडुला ने कहा कि हम शान्ति के लिए किए जा रहे प्रयासों का पूर्ण समर्थन करते हैं। बच्चों को सुरक्षित एवं सुखद वातावरण प्रदान करना हम वयस्क लोगों का कर्तव्य है, ये वो स्वयं से नहीं पा सकते। पेरू के सुपीरियर कोर्ट की प्रेसीडेन्ट न्यायमूर्ति सुश्री मारिया डेलफिना विडाल ला रोजा सांचेज ने कहा कि ग्लोबल गर्वनेन्स का समय आ चुका है। हमें सोचना है कि राजनैतिक परिवेश को विश्व शांति की स्थापना के लिए इस्तेमाल किया जाए ताकि बच्चों व आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

विभिन्न देशों से पधारे न्यायविदों व कानूनविदों ने विभिन्न पैरालल सेशन्स में गहन विचार विमर्श किया। ‘इन्फोर्सेबल वर्ल्ड लॉ’ थीम पर आधारित पैरालल सेशन में बोलते हुए निकारागुआ से पधारे न्यायमूर्ति ऑरलैंडो ग्युरेरो मेयोर्गा ने कहा कि जो देश संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा नहीं है उनके हित भी महत्वपूर्ण हैं। ज्यादा से ज्यादा भागीदारी संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रभावी बनाएगी। सूरीनाम सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आनंद कोमर चरण ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में बदलाव करके सभी देशों की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। संयुक्त राष्ट्र में देशों की समानता से ही विश्व की समस्याओं का समाधान सम्भव है। इसी प्रकार, ‘रिफार्म ऑफ यू.एन. चार्टर’, ‘ह्यूमन डेवलपमेन्ट: एजूकेशन, हेल्थ, एम्प्लॉयमेन्ट, इनइक्वालिटी’, ‘एक्शन फॉर क्लाइमेट चेन्ज’, ‘डिसआर्मामेन्ट एण्ड ए यू.एन. पीस फोर्स’, ‘रोल ऑफ एन.जी.ओ., सिविलि सोसाइटी, स्मार्ट कोलीशन इन ग्लोबल गवर्नेन्स’ थीम के अन्तर्गत विभिन्न विषयों पर जमकर विचार-विमर्श हुआ।

आज एक प्रेस कान्फ्रेन्स में मुख्य न्यायाधीशों के विचारों का निचोड़ पत्रकारों के समक्ष प्रस्तुत करते हुए सम्मेलन के संयोजक डा. जगदीश गाँधी, प्रख्यात शिक्षाविद् व संस्थापक, सी.एम.एस. ने बताया कि लगभग सभी मुख्य न्यायाधीशों, न्यायाशीशों व कानूनविदों की आम राय रही कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51(सी) विश्व की समस्याओं का एक मात्र समाधान है। मुख्य न्यायाधीशों ने इस बात को माना कि मानवता की आवाज को बुलन्द करने की जरूरत है। सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी हरि ओम ने बताया कि इस ऐतिहासिक सम्मेलन का समापन सत्र आज सायं सी.एम.एस. गोमती नगर (द्वितीय कैम्पस) ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर 61 देशों से पधारे न्यायविदों , कानूनविदों व अन्य प्रख्यात हस्तियों के सम्मान में रंगारंग साँस्कृतिक संध्या का उद्घाटन मुख्य अतिथि सुरेश खन्ना, वित्तमंत्री, उ.प्र. ने किया। श्री खन्ना ने विभिन्न देशों से पधारे न्यायविदों  व कानूनविदों से मुलाकात की एवं भावी पीढ़ी के उज्जवल भविष्य हेतु सी.एम.एस. के प्रयासों को सराहा।

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